Tuesday, October 4, 2011

वो चींटियाँ


मालूम नहीं वो चींटियाँ
सोशलिस्ट थी या कैपिटलिस्ट
मैंने तो उन्हें गुड के कण कण को
अपनी पीठ पर ढोते देखा है
बिना हड़ताल, बिना नागा 
'कैपिटल' बनाते हुए फाके के दिनों के लिए
और देखा है सोशलिस्टों की तरह
मिल बाँट कर खाते हुए एक साथ
फाके के दिनों में.

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