Tuesday, October 4, 2011

"आजाद कश्मीर " की नहीं "आबाद कश्मीर" की ज़रूरत है ..


सोचने की ज़रूरत है सच में
सोचने की ज़रूरत है 
इसलिए नहीं की गिलानी चीखता है
इसलिए नहीं की अरुंधती रोती है
पर इसलिए वो कश्मीरी बच्चा अब नहीं मुस्कुराता  
पर इसलिए की वो अल्ल्हड़ लड़कियाँ कई दिनों से नहीं निकली हैं घर से किसी अनजाने डर से
पर इसलिए टूटे मंदिर का पुजारी कई सालो दिखा नहीं 
पर इसलिए की जली मस्जिद के मौलाना की अजान में अब वो बात नहीं 
सच में सोचने की ज़रूरत है कि
उन शैतानी भूल चुके बच्चों , उन सहमी लड़कियों , उस मौलाना , और पंडित को
"आजाद कश्मीर " की नहीं "आबाद कश्मीर" की ज़रूरत है ...

1 comment:

Aniruddha said...

Good 1 Atal ji...:))